Wednesday, September 17, 2008

बेटा सबहक पर्व- जितिया

एखन कालि खन भउजी सब गप्प करैत छेलखिन्हस जितियाक बारे में। जितिया मिथिला समेत बिहार आ यूपीक पुत्रवती महिला समाजमें बड्ड लोकप्रिय उपवास अछि। मान्यता अछि जे इ उपवास कयला सँ बेटा सबहक उमैर लंबा होइत छै। उपवासक बाद जीमूतवाहन-क कथा सुनल जाति अछि। हमारा विचार सँ भारतीय आ मिथिला-क श्रुति परंपराक हिसाब सँ इ कोनो गलत पंरपरा नहिं अछि। मुदा, पितृसत्तात्मक समाजक एकटा उदाहरण इ त्योहारों अछि। हमारा विचार सँ महिला विमर्शक बौद्धिक लोकनि आ महिला अधिकारक अलंबरदार सब एहि विषय पर कतेक पन्ना लिखने हैताह।

एहि त्योहार पर जे हम सोचि रहल छी आ जे हमरा याद आवि रहल अछि ऊ कनिक अलग अछि। सोइच ई रहल छी कि जितिया त्योहारक पीछे इतिहास की भ सकैत अछि? हमरा लगैत अछि कि सौ-दो सौ बरस या ओकरो सँ पहिनै जहन मृत्युदर बेहद ज्यादा छल, अकाल, बाढ और महामारी बैशी छल...लडाईयो होइते रहल छल। ऐना में लोक सबहक औसत उम्र कम होइत छल। ३५- या ज्यादा-ज्यादा ४०। ऐना में पंडित लोकनि घबरैल मां के इ त्योहार सुझैने हेथिन्ह।

बाप बेटा के लेल इ उपवास कियै नहिं करैत छैथ ई एकटा अलग आ मह्तवपूर्ण प्रन अछि। संभवतः कमाऊ इंसान के लेल विशेष उपवास आदि केनाइ ठीक नै होइत होई।

दोसर बात जे हमरा जितिया सँ याद आवि रहल अछि.. कि परिवार में सबसँ छोट हेबाक फायदा हमरा हमेशा भेटल। हमर बहिन सबके भी कखनो एहि बातक शिकायत नहि रहल कि मां हुनकर लंबा आयु केलेल कोनो व्रत नहि करैतच छथिन्ह।

जितिया उपवास शुरु होवा सं पहिले मां हमरा भोरे उठा दैत छलखिन्ह। बहिन सब जबरिया मुंह धुलवाक थारी में चिउडा-दही परोस देइत छैलखिन्ह। मैथिली में एहि प्रक्रिया को ओँठगन कहैत जाइत अछि।
संभव अछि कि मां अकेले खा लेबाक बात नींक नहिं जानैत होइथि। लेकिन इ काज एहि त्योहारक अभिन्न अंग भ गेल अछि, कि मां भोरे-भोर लिंग विभेद बिना सब बच्चा-बुच्ची के उत्कृष्ट खाना खुआ दैत चैलथिन्ह। तँ बुझियऊ कि हमहुं बिना कोनो हील-हुज्जत के सबटा चूडा-दही सरपोइट क- बिना कथु बजनें पुनः लंबी तान दैत छलहुं। भरल पेट.. नींद खुलैत-खुलैत ९ या दस बजबाके छल। भोरे-भोर एहि भोजनभट्टगिरी करअ में जे मजा छल, से आइयो याद आवि रहल अछि।

मन कअ रहल अछि जे जितिया सँ पहिने मां लअग गाम पर जाऊ, मुदा बॉस छुट्टी देवअ सँ मना कअ रहल अछि।

2 comments:

Gajendra Thakur said...

औठघनक मोन पारि देलहुँ। कतेक लालायित रहैत छलहुँ बच्चामे हमहुँ सभ एहि पाबनिक लेल।

बहुत नीक मंजीत जी। अहाँक ब्लॉगकेँ नीचाँक लिंकपर मिथिला-मैथिली ब्लॉगमे रखने छी, एक बेर देख्अल जाओ।
http://www.videha.co.in/feedback.htm
গজেন্দ্র ঠাকুব

UMESH KUMAR MAHTO said...

manjit bhaiya,

sabhata boss ke yaih hal achhi, kyo chutti samay par nahi dait achhi,

pabani se shuru kelahu se nik lagal